बुधवार, 2 दिसंबर 2009

एक प्यार ऐशा भी

कहते हैं कि प्यार कभी मरता नहीं, इंसान मरते हैं। सुनने में यह अच्छा तो लगता है लेकिन हमेशा ऐसा होता नहीं है। मरने के बाद कौन जाने, जिंदा रहते ही लोग पति या पत्नी बदल लेते हैं। कई लोग तो ऐसे भी होते हैं जिन्होंने प्रेम विवाह किया लेकिन कुछ साल के बाद उसे छोड़कर किसी दूसरे से प्रेम कर लिया। लेकिन फ्रांस में एक महिला ने अपने मृत प्रेमी के साथ शादी रचाकर यह साबित कर दिया है कि प्यार के अमर होने की बातें सिर्फ किताबी नहीं हैं।

फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी से इजाजत लेने के बाद पूर्वी फ्रांस की 26 वर्षीय मेगाली जैकीविक्ज ने अपने प्रेमी के मरने के एक साल बाद उससे शादी रचाई। शादी के दौरान जोनाथन के एक बड़े से फोटो को उसके स्थान पर रखा गया। एक साल पहले उसके प्रेमी जोनाथन की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। दुर्घटना के दो दिन बाद ही दोनों शादी करने वाले थे।

मेगाली जार्ज ने औपचारिक शादी के बाद कहा, मेरा मन नहीं था कि मैं शादी के बाद रिसेप्शन दूं। इसलिए मैंने मेहमानों को एक-एक कप काफी पिलाकर विदा किया। उसने कहा, मेरे इस कदम को किसी ने भी गलत नहीं ठहराया है, क्योंकि मेरे इरादे नेक थे। शादी की रस्मों के बाद मेगाली ने रिश्तेदारों की मौजूदगी में दूल्हे की कब्र पर फूल चढ़ाए। फ्रांस में मृत प्रेमी या प्रेमिका के साथ शादी करने की इजाजत है। लेकिन संबंधित व्यक्ति को यह प्रमाण देना जरूरी है कि वह मरने से पहले वे दोनों शादी करने वाले थे। फ्रांस में हर साल करीब 20 ऐसे विवाह होते हैं। स्थानीय मेयर ने कहा कि मेगाली का मामला पूरी तरह से गंभीर था। ये दोनों पिछले पांच साल से साथ थे और इनके दो बच्चे भी हैं। इसलिए मेगाली को शादी की इजाजत दे दी गई।

केवल लड़को के स्कूल में पढ़ना है नुकसानदेह

यह आम धारणा है कि जो लड़के सह-शिक्षा [लड़कों और लड़कियों को साथ में शिक्षा] स्कूलों में नहीं पढ़ते, आगे चल कर लड़कियों से सामान्य व्यवहार कर पाने में उन्हें समस्या आती है। लेकिन अब एक अध्ययन में इस धारणा की पुष्टि हो गई है।

इस अध्ययन में निष्कर्ष निकला है कि जो लड़के सिर्फ लड़कों वाले स्कूल में पढ़ने जाते हैं, उनका वैवाहिक जीवन उम्र के चालीसवें पड़ाव के बाद संकट में पड़ जाता है और तलाक की आशंका बढ़ जाती है। साथ ही ये लोग जल्दी ही डिप्रेशन के शिकार होते हैं। हालांकि लड़कों के स्कूल में पढ़े जो पुरुष इन समस्याओं से मुक्त रहते हैं, वे उन्हीं की तरह सामान्य जीवन जीते हैं, जैसे सह-शिक्षा में पढ़ने वाले लड़के।

लंदन विश्वविद्यायल की शिक्षा ईकाई की प्रोफेसर डायना लियोनार्ड ने यह अध्यय प्रस्तुत किया है। इस अध्ययन में 1958 में एक ही सप्ताह में जन्मे सत्रह हजार लोगों ने हिस्सा लिया था। जिनकी शिक्षा निजी और सरकारी स्कूलों में हुई थी।

लंदन में अध्यापकों के संगठन की सचिव मैरी बास्टेड के अनुसार एक बार फिर साफ हुआ है कि सिर्फ लड़कों के लिए चलने वाले स्कूल, लड़कों को लाभ नहीं पहंचाते। जबकि लड़कियों के मामले में स्थिति उल्टी है। सिर्फ लड़कियों की स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियां पुरुषों को सहज समझ लेती हैं। यह उन्हें प्रकृति प्रदत्ता है। जबकि लड़कों के साथ ऐसा नहीं हो पाता। यदि वे सह-शिक्षा में नहीं पढ़ते, तो लड़कियों को समझने में उन्हें हमेशा मुश्किलें आती हैं।

बास्टेड के अनुसार लड़कियों के साथ पढ़ते हुए लड़के, बेहतर ढंग से सीखते हैं और उनमें अपना विकास करने की भावना भी अधिक होती है। शोध में एक रोचक तथ्य यह भी सामने आया कि सिर्फ लड़कियों के स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियां आगे चल कर गणित और विज्ञान की पढ़ाई करती हैं, जबकि सह-शिक्षा में पढ़ने वाले लड़के कला और मानविकी का अध्यय करते हैं।

शुक्रवार, 20 नवंबर 2009

बढेगा तापमान

लंदन। इस सदी के आखिर तक दुनिया का तापमान छह डिग्री बढ जाएगा जिसके विनाशकारी परिणाम होंगे। एक अध्ययन के मुताबिक उद्योगों और परिवहन से उत्सर्जित कार्बन डाइ ऑक्साइड एवं वनों की कटाई के कारण दुनिया के तापमान में इस हद तक बढोतरी होगी। ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट (जीसीपी) द्वारा लगाया गया यह अनुमान पहले लगाए गए अनुमान के मुकाबले चार डिग्र्री अधिक है।
कोपेनहेगन में अगले माह होने जा रहे जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन से पहले नेचर जियासोइंस नाम के जर्नल में जीसीपी की यह रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि वनों और समुद्रों की कार्बन डाइ ऑक्साइड को अवशोषित करने की क्षमता लगातार घट रही है। अध्ययन के मुताबिक जीवाश्म ईंधन से उत्सर्जित होने वाले कार्बन डाइ आक्साइड में वर्ष 2002 से 2008 के बीच 29 फीसदी बढोतरी हुई है।
ज्यादा उम्मीद नहींनई दिल्ली। केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री जयराम रमेश ने गुरूवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीयों को कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन पर होने जा रहे सम्मेलन से अधिक उम्मीदें नही रखनी चाहिए। रमेश ने एक समारोह में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष की 'द स्टेट ऑफ वल्र्ड पापुलेशन 2009' रिपोर्ट का लोकार्पण करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि सरकार खुद को किसी भी वैश्विक करार से अलग रखेगी, हालांकि घरेलू मोर्चे पर

चीन की तरह बने

दिल्ली। आर्थिक क्षेत्र के विशेषज्ञों तथा चीन मामलों के जानकारों का कहना है कि चीनी व्यवसायी अपने हितों को साधने में बहुत चौकन्ने तथा स्वार्थी प्रवृत्ति के होते हैं, इसलिए भारतीय कारपोरेट घरानों तथा युवा पेशेवरों को चीनी नागरिकों के साथ करार करते समय उन्हीं की शैली में काम करने की जरूरत है। उनका कहना है कि चीन दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्ति बनने की तरफ अग्रसर है और इसकी बुनियाद में उसके नागरिकों की लगन, मेहनत और अपने हितों को साधने की प्रवृत्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है। चीन का व्यवसायी अपने माल को विश्व के हर बाजार में बेचने के लिए तैयार रहता है। जहां उसके व्यवसायी पहुंचते हैं वहां उनका सामान बाजार में छा जाता है।
उन्होंने कहा कि चीन की सरकार भी घरेलू उद्योगों को निर्यात करने के लिए विशेष सुविधाएं प्रदान करती है। विशेषज्ञों ने यह विचार यहां जेके बिजनेस स्कूल के कार्यपालकों को चीन के साथ बिजनेस प्रोत्साहन विषय पर आयोजित दो दिवसीय के कार्यक्रम में व्यक्त किए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन और भारत तेजी से बढती आर्थिक शक्तियां हैं और दोनों देश एक दूसरे के बिना इस दिशा में तरक्की नहीं कर सकते। जेके बिजनेस स्कूल की महानिदेशक डॉ. रीना रामचंद्रन का कहना है कि चीन और भारत वैश्विक आर्थिक मंच पर उभर रही महाशक्तियां हैं और दुनिया में किसी भी देश की आर्थिक प्रगति का रास्ता अब इन दोनों देशों को साथ लिए बिना नहीं खुलता है। भारत के पास युवा शक्ति और ज्ञान का भंडार है जिसका इस्तेमाल चीन को अपने विकास के लिए जरूर करना चाहेगा। ऎसे में भारतीय युवा प्रतिभाओं के लिए चीन के द्वार खुल जाते हैं लेकिन उन्हें चीन के आम लोगों और कारोबारियों की प्रवृत्ति को ध्यान मे रखते हुए आगे बढने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि इन्हीं विंदुओं को ध्यान में रखते हुए उनके संस्थान ने चीन के लोगों की आम प्रवृत्ति से भारतीय कारोबारियों और युवा कार्यपालकों को अवगत कराने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया है। दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति वी.पी. दत्ता ने कहा कि चीनी बाजार में तेजी का रूख बना हुआ है और वहां की अर्थव्यवस्था जिस तेजी से बढ रही है उसे कोई रोक नहीं सकता। वहां निजी स्तर पर लोग उत्साहित हैं साथ ही सरकार भी लोगों की मदद कर रही है। चीन और भारत को व्यापारिक स्तर पर एक दूसरे की मदद मिल रही है लेकिन जापान जैसे देशों का भारत पर बहुत भरोसा नहीं है। बल्कि यह कहें कि पूर्वी एशियाई देशों के संगठन आसियान का रूख भी भारत के प्रति बहुत सकारात्मक नहीं है। चीन की स्थिति दूसरी है, उसकी 40 प्रतिशत जरूरत विदेशों से ही पूरी होती है इसलिए भारत पर उसकी निर्भरता स्वाभाविक है।
दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर मधु भल्ला का कहना था कि 1978 और आज के चीन की अर्थव्यवस्था में जमीन आसमान का अंतर है। भारतीय कम्पनियों का चीन के प्रति मोह बढ रहा है इसलिए कई भारतीय कम्पनियों ने वहां अपने प्रतिनिधि कार्यालय भी खोले हैं। चीनी बाजार में भारतीय व्यापारियों के लिए बहुत सम्भावनाएं हैं लेकिन वहां के बाजार को समझना है कि उन्हें भारतीय व्यापारियों से किस स्तर पर सहयोग लेना है। भारत की कम्पनियों को जरा प्रयास करने की जरूरत है वहां तो पार्टनर बैठे हैं।
भारत के साथ सबसे अच्छी बात यह है कि यहां का नौजवान विपरीत स्थितियों से लड सकता है और विदेशों में सहयोग करने के लिए तैयार बैठा है। भारत को ज्ञान का आधार बनना है और अपनी युवा शक्ति को इसके लिए तैयार रखना है। चीन के साथ व्यापार के लिए नए क्षेत्रों की तलाश करनी होगी। जवाहर लाल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बी.आर. दीपक ने कहा कि चीन कितना तेजी से आगे बढ रहा है इसका आकलन इसी आंकडे से लगाया जा सकता है कि 1991 में चीन का सकल घरेलू उत्पाद 352 अरब डॉलर था जो 2009

शनिवार, 17 अक्टूबर 2009

दीपावली की शुभ कामना






साथियों


दीपावली की आप सब पाठको को हार्दिक शुभ कामना आपके जीवन में सुख का निवास हो यही हमारी मंगल कामना है


कृपया दिवाली पर पटाखों का इस्तेमाल कम से कम करे यह पर्यावरण के लिए हानिकारक है


आइये हम सब ज्योति पर्व दिवाली पर भारत को जगमगाए ज्ञान और प्रकाश से



भारतीय एकता संगठन


इलाहबाद

शनिवार, 29 अगस्त 2009

स्वतंत्रता दिवस की शुभ कामनाये

साथियों

भारत के पावन पर्व की शुभ कामनाये आइये हम सब मिल कर ये रास्ट्रीय पर्व प्यार से मनाये

गर्व से कहो हम भारतीय है भारत हमारा देश है हम भारत वासी है

टीम भारतीय एकता इलाहबाद

सोमवार, 27 जुलाई 2009

इलाहाबाद सुखा ग्रस्त घोषित

यु पि टीऐ में दाखिला शुरू

इलाहाबाद एक नजर

इलाहबाद टॉप सूची

०१- माँघ मेला प्रतिवर्ष
०२- उत्तर मध्य रेलवे का मुख्यालय
०३- उत्तर प्रदेश पुलिस का मुख्यालय
०४-उच्चतम न्यायालय
०५-माध्यमिक शिक्षा परिषद्
०६- आनंद भवन ,स्वराज भवन
०७- खुसरू बाग़ , किला , हनुमान मन्दिर
०८- त्रिवेणी संगम
०९-उल्टा किला झूसी , अलोपी मन्दिर
१०- सेंट्रल जेल , औधोगिक चेत्र
११- शिक्षा , संस्कार इलाहाबाद की पहचान

भारतीय एकता संगठन की कलम से