कहते हैं कि प्यार कभी मरता नहीं, इंसान मरते हैं। सुनने में यह अच्छा तो लगता है लेकिन हमेशा ऐसा होता नहीं है। मरने के बाद कौन जाने, जिंदा रहते ही लोग पति या पत्नी बदल लेते हैं। कई लोग तो ऐसे भी होते हैं जिन्होंने प्रेम विवाह किया लेकिन कुछ साल के बाद उसे छोड़कर किसी दूसरे से प्रेम कर लिया। लेकिन फ्रांस में एक महिला ने अपने मृत प्रेमी के साथ शादी रचाकर यह साबित कर दिया है कि प्यार के अमर होने की बातें सिर्फ किताबी नहीं हैं।
फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी से इजाजत लेने के बाद पूर्वी फ्रांस की 26 वर्षीय मेगाली जैकीविक्ज ने अपने प्रेमी के मरने के एक साल बाद उससे शादी रचाई। शादी के दौरान जोनाथन के एक बड़े से फोटो को उसके स्थान पर रखा गया। एक साल पहले उसके प्रेमी जोनाथन की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। दुर्घटना के दो दिन बाद ही दोनों शादी करने वाले थे।
मेगाली जार्ज ने औपचारिक शादी के बाद कहा, मेरा मन नहीं था कि मैं शादी के बाद रिसेप्शन दूं। इसलिए मैंने मेहमानों को एक-एक कप काफी पिलाकर विदा किया। उसने कहा, मेरे इस कदम को किसी ने भी गलत नहीं ठहराया है, क्योंकि मेरे इरादे नेक थे। शादी की रस्मों के बाद मेगाली ने रिश्तेदारों की मौजूदगी में दूल्हे की कब्र पर फूल चढ़ाए। फ्रांस में मृत प्रेमी या प्रेमिका के साथ शादी करने की इजाजत है। लेकिन संबंधित व्यक्ति को यह प्रमाण देना जरूरी है कि वह मरने से पहले वे दोनों शादी करने वाले थे। फ्रांस में हर साल करीब 20 ऐसे विवाह होते हैं। स्थानीय मेयर ने कहा कि मेगाली का मामला पूरी तरह से गंभीर था। ये दोनों पिछले पांच साल से साथ थे और इनके दो बच्चे भी हैं। इसलिए मेगाली को शादी की इजाजत दे दी गई।
बुधवार, 2 दिसंबर 2009
केवल लड़को के स्कूल में पढ़ना है नुकसानदेह
यह आम धारणा है कि जो लड़के सह-शिक्षा [लड़कों और लड़कियों को साथ में शिक्षा] स्कूलों में नहीं पढ़ते, आगे चल कर लड़कियों से सामान्य व्यवहार कर पाने में उन्हें समस्या आती है। लेकिन अब एक अध्ययन में इस धारणा की पुष्टि हो गई है।
इस अध्ययन में निष्कर्ष निकला है कि जो लड़के सिर्फ लड़कों वाले स्कूल में पढ़ने जाते हैं, उनका वैवाहिक जीवन उम्र के चालीसवें पड़ाव के बाद संकट में पड़ जाता है और तलाक की आशंका बढ़ जाती है। साथ ही ये लोग जल्दी ही डिप्रेशन के शिकार होते हैं। हालांकि लड़कों के स्कूल में पढ़े जो पुरुष इन समस्याओं से मुक्त रहते हैं, वे उन्हीं की तरह सामान्य जीवन जीते हैं, जैसे सह-शिक्षा में पढ़ने वाले लड़के।
लंदन विश्वविद्यायल की शिक्षा ईकाई की प्रोफेसर डायना लियोनार्ड ने यह अध्यय प्रस्तुत किया है। इस अध्ययन में 1958 में एक ही सप्ताह में जन्मे सत्रह हजार लोगों ने हिस्सा लिया था। जिनकी शिक्षा निजी और सरकारी स्कूलों में हुई थी।
लंदन में अध्यापकों के संगठन की सचिव मैरी बास्टेड के अनुसार एक बार फिर साफ हुआ है कि सिर्फ लड़कों के लिए चलने वाले स्कूल, लड़कों को लाभ नहीं पहंचाते। जबकि लड़कियों के मामले में स्थिति उल्टी है। सिर्फ लड़कियों की स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियां पुरुषों को सहज समझ लेती हैं। यह उन्हें प्रकृति प्रदत्ता है। जबकि लड़कों के साथ ऐसा नहीं हो पाता। यदि वे सह-शिक्षा में नहीं पढ़ते, तो लड़कियों को समझने में उन्हें हमेशा मुश्किलें आती हैं।
बास्टेड के अनुसार लड़कियों के साथ पढ़ते हुए लड़के, बेहतर ढंग से सीखते हैं और उनमें अपना विकास करने की भावना भी अधिक होती है। शोध में एक रोचक तथ्य यह भी सामने आया कि सिर्फ लड़कियों के स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियां आगे चल कर गणित और विज्ञान की पढ़ाई करती हैं, जबकि सह-शिक्षा में पढ़ने वाले लड़के कला और मानविकी का अध्यय करते हैं।
इस अध्ययन में निष्कर्ष निकला है कि जो लड़के सिर्फ लड़कों वाले स्कूल में पढ़ने जाते हैं, उनका वैवाहिक जीवन उम्र के चालीसवें पड़ाव के बाद संकट में पड़ जाता है और तलाक की आशंका बढ़ जाती है। साथ ही ये लोग जल्दी ही डिप्रेशन के शिकार होते हैं। हालांकि लड़कों के स्कूल में पढ़े जो पुरुष इन समस्याओं से मुक्त रहते हैं, वे उन्हीं की तरह सामान्य जीवन जीते हैं, जैसे सह-शिक्षा में पढ़ने वाले लड़के।
लंदन विश्वविद्यायल की शिक्षा ईकाई की प्रोफेसर डायना लियोनार्ड ने यह अध्यय प्रस्तुत किया है। इस अध्ययन में 1958 में एक ही सप्ताह में जन्मे सत्रह हजार लोगों ने हिस्सा लिया था। जिनकी शिक्षा निजी और सरकारी स्कूलों में हुई थी।
लंदन में अध्यापकों के संगठन की सचिव मैरी बास्टेड के अनुसार एक बार फिर साफ हुआ है कि सिर्फ लड़कों के लिए चलने वाले स्कूल, लड़कों को लाभ नहीं पहंचाते। जबकि लड़कियों के मामले में स्थिति उल्टी है। सिर्फ लड़कियों की स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियां पुरुषों को सहज समझ लेती हैं। यह उन्हें प्रकृति प्रदत्ता है। जबकि लड़कों के साथ ऐसा नहीं हो पाता। यदि वे सह-शिक्षा में नहीं पढ़ते, तो लड़कियों को समझने में उन्हें हमेशा मुश्किलें आती हैं।
बास्टेड के अनुसार लड़कियों के साथ पढ़ते हुए लड़के, बेहतर ढंग से सीखते हैं और उनमें अपना विकास करने की भावना भी अधिक होती है। शोध में एक रोचक तथ्य यह भी सामने आया कि सिर्फ लड़कियों के स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियां आगे चल कर गणित और विज्ञान की पढ़ाई करती हैं, जबकि सह-शिक्षा में पढ़ने वाले लड़के कला और मानविकी का अध्यय करते हैं।
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